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क्या मुम्बई मराठियो की जागीर है?

आपने अखबारो मे पढा होगा के मुम्बई के ठेकेदार उत्तर भारतीयो को निशाना बना रहे है। उन्होने खास तौर पे बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगो को निशान बनाया है। कल ही उनका नया शिकार बना है शाहरुख खान जिसने यह कहने कि हिमाकत करी कि वो दिल्ली क रहने वाला है।

तो क्या हुआ अगर वो दिल्ली का है? तो क्या हुआ अगर कोई गरीब मज़दूर अपने और अपने परिवार के पेट की आग भुझाने भारत के किसी भि शहर मे जाता है? क्या मुम्बई भारत का एक शहर नही है या ठाकरे साहब

भारत और उसके सन्विधान से ऊपर है?

क्या एक भारतीय नागरिक मुम्बई मेइन काम करने नही जा सकता?

क्या एक भारतीय नागरिक मुम्बई मेइन तभी रह सकता है जब वो वहा के तानाशाह क हुक्म माने?

अगर गैर मराठी लोग मुम्बई से चले जाये तो क्या मुम्बई इतनी ही सम्रिद्ध रहेगी?

इन तानाशाहो ने मुख्यत: फ़िल्मी सितारो को ही अपना निशाना बनाया है, तो क्या वो सोचते है कि उर्मिला मतोन्डकर और नाना पाटेकर जैसे कलाकार फ़िल्म नगरी को ऊन्चाईयो पर ले जायेगे?

क्या ये तानाशाह भारतीय कानून से ऊपर है?

उन्हे किसने ये हक दिया है के वो किसी भारतीय नागरिक को मुम्बई से बाहर फेक दे?

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